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News & Analysis

जापान की विकास एजेंसी टीबी के खिलाफ केन्या के संघर्ष में सहायता कर रही है

रॉबर्ट किबेट द्वारा

नैरोबी (आईडीएन) - केन्या के एक विश्वविद्यालय में सिविल इंजीनियरिंग की तीसरे वर्ष की छात्रा, 26 वर्षीया कैथरीन एनडूटा को 2012 में बहु-दवा प्रतिरोधी तपेदिक (एमडीआर-टीबी) होने की पुष्टि हुई थी।

एनडूटा ने स्टॉपटीबी पार्टनरशिप द्वारा आयोजित फ़ोरम, जिसने केन्या के सांसदों का भी ध्यान आकर्षित किया, को बताया, "मैं लगभग 6 महीने की गर्भवती थी इसलिए मेरा एमडीआर-टीबी का इलाज प्रारंभ नहीं हो सकता था। मेरे पास दो विकल्प थे, या तो दवा शुरू करने के लिए मैं गर्भपात करवाऊं या बच्चे के जन्म तक मैं टीबी के उपचार की सामान्य दवा लेती रहूँ।"

एनडूटा, जो अभी एक लड़के की माँ हैं, आगे कहती हैं, "अंततः मुझे प्रेरण करवाना पड़ा और दवा शुरू करने के लिए मेरा गर्भपात करवा दिया गया। मुझे 12 महीने तक इंजेक्शन्स लगते रहे और 24 महीने तक दवा की गोलियां खानी पड़ीं, ये वाकई कठिन था।"

एमडीआर-टीबी से पीड़ित एनडूटा अकेली नहीं है। नैरोबी और मोम्बासा, जो केन्या के दो सबसे बड़े शहर हैं, में शहरी बस्तियों की ख़राब व्यवस्था और उच्च जनसंख्या के कारण सामान्य तपेदिक के मामलों की संख्या सबसे ज्यादा है।

आवास, स्वच्छता और पोषण के आभाव में नैरोबी की 3.5 लाख की आबादी का 60 प्रतिशत गन्दी बस्तियों में रहने को मजबूर है, और इस कारण ये लोग आसानी से संक्रमण का शिकार हो जाते हैं।


केन्या के स्वास्थ्य मंत्रालय में तपेदिक, कुष्ठ रोग और फेफड़ों की बीमारी के विभागाध्यक्ष ने आईडीएन को बताया, "पहचान और उपचार के आभाव में दवा प्रतिरोधी टीबी (डीआर-टीबी) केन्या में एक उभरता हुआ ख़तरा है। इसका इलाज लगभग 20 महीने चलता है और इसकी दवाओं पर लगभग 30 लाख केन्याई शिलिंग (लगभग 28,000 अमरीकी डॉलर) का ख़र्च होता है।"

उन्होंने कहा, "तपेदिक से पीड़ित लोगों में से अधिकांश ग़रीब हैं और इलाज का ख़र्च नहीं उठा सकते हैं।"

इसे ध्यान में रखते हुए, जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (जेआईसीए) टीबी से लड़ने में केन्या की सहायता कर रही है। दक्षिण अफ्रीका और जाम्बिया के साथ, यह पूर्वी अफ्रीकी राष्ट्र, अफ्रीका के उन तीन देशों में शुमार है जहाँ टीबी की समस्या स्थानिक है।

2013 में जब सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारी दवा प्रतिरोधी टीबी के बढ़ते मामलों को ले कर आशंकित थे, जेआईसीए ने 32 लाख केन्याई शिलिंग (लगभग 313,528.96 अमरीकी डालर) मूल्य के अत्याधुनिक टीबी परीक्षण उपकरण दान किये थे।

केन्या में जेआईसीए के मुख्य प्रतिनिधि, किको सानो ने आईडीएन को बताया, "हाल के वर्षों में, टीबी की रोकथाम के लिए जेआईसीए की सहायता का मुख्य क्षेत्र प्रयोगशालाओं की क्षमता और उनके नेटवर्क (डीआर-टीबी की पहचान करने और प्रयोगशाला जांच के नए तरीके लागू करना, जैसे प्रतिदीप्त सूक्ष्मदर्शी का उपयोग, दवा की संवेदनशीलता परीक्षण में सुधार) को बढ़ाना रहा है।

जेआईसीए ने केन्या के लोक स्वास्थ्य मंत्रालय को 102 एलईडी प्रदीप्त सूक्ष्मदर्शी भी दान किये। देश के सभी सार्वजनिक स्वास्थ्य केन्द्रों में ऐसी केवल 20 मशीनें थीं।

एमडीआर-टीबी की दवाओं की कमी के कारण 2014 में केन्या दुविधा में था, और मलावी और युगांडा जैसे पड़ौसी देशों से उधार लेने के लिए विवश था।



स्टॉपटीबी पार्टरनशिप केन्या, वह संगठन जो टीबी से लड़ने के लिए भागीदारों को एक मंच पर लाता है, के प्रमुख राष्ट्रीय समन्वयक, एवलीन कीबुचि कहते हैं, "यह एक बड़ी शर्मिंदगी की बात थी।"


सानो कहते हैं कि न केवल जेआईसीए बल्कि सम्पूर्ण अंतरराष्ट्रीय समुदाय का मानना है कि टीबी जैसे महंगे रोग के सतत नियंत्रण के लिए घरेलू वित्तपोषण बहुत महत्वपूर्ण है।

केन्या में जेआईसीए के मुख्य प्रतिनिधि ने एक साक्षात्कार में आईडीएन को बताया, "धीरे-धीरे घरेलू वित्त पोषण बढ़ाने के लिए केन्या सरकार की प्रतिबद्धता का हम स्वागत करते हैं। टीबी से संबंधित सेवाओं का अन्य स्वास्थ्य सेवाओं के साथ एकीकरण, लागत को बचा सकता है। इस संदर्भ में एकीकृत सेवाओं की गुणवत्ता को बनाए रखना महत्वपूर्ण है।"

सानो ने बताया कि हालाँकि जापान हाल ही में अपनाए गए सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी), जो कि दिसंबर में अगले 15 वर्षों के लिए सहस्राब्दि विकास लक्ष्यों (एमडीजी) का स्थान लेंगे, को पूर्णतः अंगीकार करता है, लेकिन संचारी रोगों की रोकथाम, जिसमें टीबी भी शामिल है, अभी भी जेआईसीए के एजेंडे पर प्राथमिकता लिए हुए है।

सानो ने कहा, "जापान ने हाल ही में अपनी नई पांच-वर्षीय वैश्विक स्वास्थ्य नीति (2016-2020) शुरू की है। हम यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (UHC) को प्राप्त करने में केन्या की सहायता करने के लिए प्रतिबद्ध हैं और स्वास्थ्य प्रणाली, जो रोग-विशेष कार्यक्रम के बेहतर ढंग से काम करने का आधार है, को मजबूत बनाने में विश्वास करते हैं।"

केन्याई संसद सदस्य और राष्ट्रीय संसद स्वास्थ्य कॉकस समिति के सदस्य, जेम्स मुरगोर 'दाता की थकान' के बारे में चिंतित हैं क्योंकि इस पूर्वी अफ्रीकी देश को एक मध्यम आय वाले देश के रूप में गिना जा रहा है। वह टीबी से निपटने के लिए अधिक सरकारी पूँजी की अपील करते हैं।

मुरगोर सकल राष्ट्रीय प्रति व्यक्ति आय (जीएनआई) के वर्ल्ड बैंक के नवीनतम अनुमानों की बात करते हैं जो कई निम्न-आय वाले देशों का उन्नत आर्थिक प्रदर्शन दर्शाते हैं, जिनके अनुसार बांग्लादेश, केन्या, म्यांमार और तजाकिस्तान अब निम्न-मध्य आय वर्ग वाले देशों की श्रेणी में आ गए हैं जिनकी सालाना आय 1,046 डॉलर से 4,125 डॉलर के बीच है।

मुरगोर ने अपनी चिंता का कारण बताते हुए कहा, "यहाँ केन्या में हमारे लिए, टीबी के विरूद्ध लड़ाई में होने वाले ख़र्च का 40 प्रतिशत सरकारी राशि से और 60 प्रतिशत दानदाताओं से प्राप्त राशि से होता है, जो कि जोखिम भरा है।"

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, "तपेदिक केन्या में रुग्णता और मृत्यु दर का एक प्रमुख कारण बना हुआ है। यह सभी आयु वर्ग को प्रभावित करता है, लेकिन इसका सबसे अधिक शिकार होने वाला आयु वर्ग है 15-44 साल जो कि सबसे बड़ा उत्पादक वर्ग है।" अनुमान के मुताबिक केन्या में प्रति दिन 60 लोग तपेदिक के कारण दम तोड़ते हैं।

इसके अतिरिक्त, जैसा की कीबुचि कहते हैं, "जब हम कार्य-क्षेत्र पर इस रोग के प्रभाव का आकलन करते हैं तो पाते हैं कि यह काफ़ी महंगा रोग है। इसके कारण अनुपस्थिति बढ़ती है, कार्य का प्रवाह बाधित होता है, उत्पादकता कम होती है और प्रभावित व्यक्ति को प्रत्यक्ष कीमत चुकानी पड़ती है।"

अनुमान के मुताबिक, विश्व भर में टीबी के कारण 13 अरब अमरीकी डॉलर का नुकसान होता है, जबकि केन्या लगभग 11 करोड़ अमरीकी डॉलर का नुकसान उठाता है।

जेआईसीए के टीबी सलाहकार, ताकाशी मिउरा कीबुचि से सहमत होते हुए कहते हैं कि एमडीआर-टीबी के मरीज़ों के उपचार लम्बे समय तक चलता है, इसमें दो वर्ष तक लग जाते हैं, इसलिए यह उपचार मरीज़ों को काफ़ी महंगा पड़ता है।

उन्होंने आईडीएन को बताया, "यदि इलाज मुफ्त हो तो भी रोगियों का आर्थिक नुकसान से बचना असंभव है क्योंकि इलाज के दौरान मरीज़ की उत्पादकता प्रभावित होती है। [आईडीएन- इनडेप्थन्यूज़ – 20 अक्टूबर 2015]

यह लेख आईपीएस उत्तरी अमेरिका, वैश्विक सहयोग परिषद और देवनेट टोक्यो की संयुक्त मीडिया परियोजना का हिस्सा है।

 

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