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The adoption of the 2030 Sustainable Development Agenda, with its core set of 17 Sustainable Development Goals (SDGs), are the UN’s blueprint for achieving a happier and healthier world by 2030. But how do we all manifest these goals in our own lives? The Be the Change Initiative provides an opportunity for all of us to better “walk the talk” when it comes to the SDGs. This initiative guides and encourages us to live more sustainable in work and at home by changing our consumption patterns, using active transport such as cycling, and buying local foods.

News & Analysis

सतत विकास लक्ष्यों (ऐसडीजी) को हासिल करने के लिए कोरिया के ‘सेमाल उंडांग’ से सीख

सौजन्य अरुणा दत्त एवं वेलेंटीना इएरी



संयुक्त राष्ट्र (आईपीऐस) -- विश्व भर में करीब 330 करोड़ लोग ग्रामीण इलाकों में रहते हैं। अतः वर्ष 2030 के लिए नियत अजेंडा फार सस्टेनेबल डेवेलपमेंट अर्थात सतत विकास का अजेंडा – “लोगों, गृह एवं समृद्धि के लिए एक कार्ययोजना” -- साकार करना है तो ग्रामीण विकास अत्यंत महत्वपूर्ण है।

सितंबर 25, यानि जिस दिन विश्व के नेताओं ने न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में एक मत से 17 सतत विकास लक्ष्यों को अपनी सहमति दी, के ठीक एक दिन बाद 34 देशों के आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) के विकास केंद्र, कोरियाई विदेश मंत्रालय एवं संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूऐनडीपी) ने मिल कर विकासशील देशों में इन लक्ष्यों को हासिल करने के तरीकों पर विचार करने के लिए एक ऐतिहासिक सेमिनार का आयोजन किया।

इस सेमिनार का केन्द्रबिन्दु था नया ग्रामीण विकास प्रतिमान एवं समावेशी व नूतन समुदाय मॉडल, जो कि कोरिया के सेमाल उंडांग के सफल प्रयोग से प्रेरित है।

सभा को संबोधित करते हुए संयुक्त राष्ट्र महासचिव श्री बैन की-मून, जो कि जनवरी 2004 से नवंबर 2006 तक दक्षिणी कोरिया के विदेश मंत्री थे, ने कहा: “कोरिया के ग्रामीण क्षेत्र दरिद्रता से खुशहाली की ओर अग्रसर हुए हैं” एवं सेमाल उंडांग के लक्ष्य वही हैं जो सतत विकास लक्ष्यों में प्रस्तावित किए गए हैं। शिक्षा, परिश्रम, स्वयं सहायता और आपसी सहयोग के प्रमुख सिद्धांतों पर आधारित सेमाल उंडांग विश्व में सतत खुशहाली के लिए ग्रामीण विकास का नया प्रतिमान सिद्ध हो सकता है।

इस सेमिनार में दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति श्रीमती पार्क ग्वेन- ही ने भी भाग लिया, और उन्होने सभा को बताया कि किस प्रकार कोरिया अब ओईसीडी एवं यूऐनडीपी के साथ सहयोग कर रहा है ताकि नूतन ग्रामीण विकास मॉडल को प्रत्येक देश की विशिष्ट परिस्थितियों के अनुसार ढाला जा सके।

राष्ट्रपति पार्क ने कहा “सेमाल उंडांग ने कोरिया का असीम उत्थान किया है और हमारे समाज का रूपान्तरण हो गया है”। “हम विश्व के निर्धनतम राष्ट्रों में गिने जाते थे, [...] आज हम विश्व की 15 सबसे बड़ी अर्थ व्यवस्थाओं में शामिल हैं, और साथ ही विश्व के प्रमुख सहायता दाताओं में भी”।
हालांकि अधिकतर विश्लेषक कोरिया के विकास का श्रेय उनके फलते-फूलते उद्योगों को देते हैं, परंतु संयुक्त राष्ट्र में दक्षिण कोरिया के मिशन के उपस्थायी प्रतिनिधि श्री चोंगही हान के अनुसार सेमाल उंडांग ही वह एकमात्र ऐसा कारक है जो 70 के दशक में सफलता का प्रमुख कारण बना और तेज़ी से बढ़ते शहरीकरण और औद्योगीकरण के आज के युग में यह भविष्य में भी पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ विकास के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

हान ने आईपीऐस के साथ एक साक्षात्कार में बताया “आज प्रत्येक व्यक्ति को अपनी भविष्य दृष्टि निराशा से आशा व निर्धनता से खुशहाली में परिवर्तित करने के लिए इसी आंदोलन की आवश्यकता है”। “कोरिया विकास का यह अनुभव विश्व के प्रत्येक राष्ट्र के साथ सांझा करेगा”।

हान ने कहा कि सेमाल उंडांग को आम विकास रणनीतियों से पृथक करने वाले मुख्य बिन्दु अभी से विश्व के 30 देशों की विकास परियोजनाओं में शामिल किए जा रहे हैं, जैसे कि इथियोपिया, युगांडा, रवांडा, तंजानिया, अफगानिस्तान, म्यांमार, लाओ एवं कंबोडिया। इनमें शामिल हैं महत्वपूर्ण रणनीतियाँ जैसे कि अपनी कार्य कुशलता में आत्मविश्वास, लैंगिक समानता के प्रति सजगता एवं मानवाधिकारों का सम्मान।

कोरिया की राष्ट्रपति पार्क ग्वेन ही के पिता पार्क चुँग ही ने 70 के दशक में सेमाल उंडांग की शुरूआत की थी, और प्रारम्भ में उन्होने हर गाँव को सीमेंट एवं स्टील उपलब्ध करवाया ताकि यह देखा जा सके कि कौन सा गाँव इन संसाधनों का कितने श्रेष्ठ ढंग से उपयोग कर पाता है। इसके बाद सरकार ने सबसे श्रेष्ठ आने वाले गांवों को और संसाधन दिए, जिससे पड़ोस के गांवों में ण केवल एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा उत्पन्न हुई बल्कि एकजुट हो कर परिश्रम करने का जज़्बा भी।

परिणामस्वरूप इस कार्यक्रम ने नागरिकों के मध्य एक एकजुटता एवं विश्वास की भावना उत्पन्न की, और उन्हें लगने लगा कि वे भी अपने समुदाय व देश को बेहतर बनाने के लिए योगदान दे सकते हैं। लोगों के जोश को और प्रोत्साहन देने के लिए ध्वजों, गीतों, व आध्यात्मिक प्रशंसापत्रों जैसे प्रेरक तरीकों का प्रयोग भी किया गया।

हान ने कहा “इसीलिए संगीत कोरिया की विकास प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण भाग रहा है।” समुदायों के द्वारा गाए जाने वाले दो सबसे लोकप्रिय गीत स्वयं राष्ट्रपति पार्क द्वारा संगीतबद्ध किए गए थे। हान ने उन दिनों को याद करते हुए बताता कि “जहाँ गीत ‘जल सालाह बोसेह’ ने ऐश्वर्य और खुशहाली का संदेश दिया, वहीं गीत ‘सेब्यूक जोंग-ई उलर्यूत्नेह’ का संदेश था “आज एक नया दिन है, आओ मिलकर एक नया गाँव तैयार करें”।

हान के अनुसार स्थानीय एजेंसियों के माध्यम से आत्मनिर्भरता पर अटूट भरोसा, देश को विदेशी मदद पर कम से कम निर्भर रहने देना और स्वयं भी कम से कम सरकारी मदद लेना, यही विकास की प्रमुख रणनीतियाँ रहीं। इसका परिणाम हुआ कि अन्य सतत विकास परियोजनाएँ भी सामने आने लगीं और 1980 के दशक के आते आते यह परियोजनाएँ सरकारी बजट के बजाय अधिक से अधिक सामुदायिक व वित्तीय संसाधनों से चलाई जाने लगीं।
क्या सेमाल उंडांग का अनुभव किसी अन्य स्थान पर भी सफलतापूर्वक चलाया जा सकता है? ओईसीडी केंद्र के निदेशक मारियो पेज़्ज़िनी के अनुसार, हाँ!

विश्व की 330 करोड़ ग्रामीण जनसंख्या का 92 प्रतिशत भाग विकासशील देशों में रहता है और यह संख्या 2028 तक बढ्ने का अनुमान है। पेज़्ज़िनी ने आईपीऐस के साथ एक साक्षात्कार में कहा “सतत विकास लक्ष्यों (ऐसडीजी) को सफल रूप से कार्यान्वित करने के लिए ‘ग्रामीण लेंसों’ का प्रयोग अपरिहार्य है।

विश्व के अधिकतर निर्धन ग्रामीण इलाकों में बसे हैं और वे बढ़ती असमानताओं व नगरीय क्षेत्रों द्वारा सामिलित किए जाने की अक्षमता से जूझ रहे हैं।

क्योंकि यह लोग पर्यावरण, सामाजिक और आर्थिक अस्थिरता से दो चार हैं, अतः इन्हें अकेला नहीं छोड़ा जा सकता। पेज़्ज़िनी ने समझाया “हमें ध्यान रखना होगा कि ग्रामीण विकास का अर्थ मात्र कृषि का विकास या पतन नहीं है”।

कृषि ग्रामीण आर्थिकियों का एक महत्वपूर्ण भाग है। साथ ही ओसीसीडी के विकास केंद्र के इतालवी निदेशक ने कहा कि कृषि उत्पादकता की वृद्धि से उस ग्रामीण जनमानस की अतिरेकता बढ़ती है जो कृषि कार्य में नहीं लगे हैं।

उन्होने ज़ोर दिया कि ग्रामीण विकास की बात करते हुए हमें सम्पूर्ण स्थानीय अर्थव्यवस्था पर ध्यान देना होगा, जिसमें कृषि भी शामिल है, परंतु कृषि के अलावा इसमें गैर कृषि रोज़गार भी शामिल करना आवश्यक है। अतः ग्रामीण विकास केवल कृषि विकास से संभव नहीं हो पाएगा, और ना ही केवल औद्योगिक विकास से।

इससे नीति निर्धारण में एक क्रातिकारी दृष्टिकोण का उद्गम होगा।

पेज़्ज़िनी ने बताया कि सेमाल उंडांग आंदोलन पर आधारित नए ग्रामीण प्रतिमान में शामिल होना चाहिए “एक नई तरह का स्थानीय व क्षेत्रीय विकास, एक बहु क्षेत्रीय, बहु एजेंट एवं बहुआयामी विकास, जो विभिन्न गतिविधियों पर ध्यान दे सके”।

सरकारों के नए अजेंडों में ध्यान केन्द्रित होना चाहिए ग्रामीण क्षेत्रों की विविध परिसंपत्तियों पर, जिनके लिए विभिन्न और विशिष्ट हस्तक्षेपों की आवश्यकता है। उन्होने आगे कहा कि जब केंद्र सरकारें अपने स्तर पर ही स्कीमें तैयार कर लेती हैं, जिनमें स्थानीय लोगों व ज्ञान पर ध्यान नहीं दिया जाए और केवल ऊपर से नीतियाँ थोप दी जाएँ, अधिकतर ऐसी स्कीमें बुरी तरह विफल होती हैं।

“एक अकेला व्यक्ति या संस्था इसे सफल नहीं बना सकता”। परंतु यदि सार्वजनिक क्षेत्र को प्रभावशाली बनना है तो उन्हें निजी क्षेत्र, यूनियनों एवं आम नागरिकों को साथ लेना होगा। पेज़्ज़िनी ने घोषित किया “महत्वपूर्ण बिन्दु यह है कि उन परिसंपत्तियों का समुचित उपयोग कैसे किया जाए जो अब तक उपयोगी नहीं बनाई जा सकी हैं”। (30 सितंबर 2015)

यह आर्टिकल आईपीऐस उत्तरी अमरीका के मीडिया प्रोजेक्टका भाग है और इसमें ग्लोबल कोपरेशन काउंसिल एवं डेवनेट टोक्यो उनके सहयोगी हैं।

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