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News & Analysis

छः मेकांग देशों ने रीजनल ड्रग स्ट्रेटजी को मजबूती प्रदान की

लेखक जे. नेस्ट्रेनिस

न्यूयार्क (आईडीएन) - औषध नियंत्रण पर मेकांग समझौता ज्ञापन (एमओयू), एक ऐसा फ्रेमवर्क जिसमें पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशिया के छः देशों में कानून प्रवर्तन, आपराधिक न्याय, वैकल्पिक विकास और स्वास्थ्य प्रतिक्रियाओं को शामिल किया गया है, इस पर हस्ताक्षर होने के पच्चीस वर्ष से अधिक समय बाद भी काफी महत्वपूर्ण बना हुआ है।

काफी प्रयासों के बावजूद एमओयू करने वाले छः देश - कंबोडिया, चीन, लाओ पीडीआर, म्यांमार, थाईलैंड और वियतनाम - जिनसे मिलकर ग्रेटर मेकांग उप-क्षेत्र बनता है, अवैध दवाओं और प्रीकर्सर रसायनों के प्रवाह को क्षेत्र में, क्षेत्र से और क्षेत्र तक फैलने से रोकने में निरंतर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

एक दशक की निरंतर गिरावट के बाद अफीम की अवैध खेती में 2006 के बाद से हर साल वृद्धि हुई है। आज इसकी खेती म्यांमार और लाओ पीडीआर में केंद्रित हो गयी है। सिंथेटिक दवाएं, विशेष रूप से गोली और क्रिस्टल के रूपों में मेथाम्फेटामाइन इस उप-क्षेत्र में प्राथमिक औषध खतरे के रूप में उभरी हैं। पथांतरण और उसके बाद प्रीकर्सर रसायनों की तस्करी तथा नए साइकोएक्टिव दवाओं के आने से भी यह क्षेत्र काफी प्रभावित हो रहा है।

यह बात विश्व ड्रग समस्या पर संयुक्त राष्ट्र महासभा के विशेष सत्र (UNGASS) की सीमाओं पर ड्रग्स और अपराध पर मेकांग देशों और वियना-स्थित यूएन कार्यालय (UNODC) द्वारा 19 अप्रैल को आयोजित एक उच्च स्तरीय ब्रीफिंग से उभर कर सामने आयी जिसने प्रसिद्ध स्वर्ण त्रिभुज सहित इस क्षेत्र में नशीली दवाओं की वर्तमान स्थिति के बारे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय को जानकारी दी।

प्रारंभ में तीन वर्ष की अवधि को कवर करने के लिए 1995 में किये गए एमओयू को 1997 में बदल कर समय सीमा से मुक्त एक रोलिंग कार्ययोजना शामिल की गयी जिसे समय-समय पर संशोधित और अपडेट किया जाना आवश्यक है ताकि नशीली दवाओं के नियंत्रण की नई उभरती प्राथमिकताओं का बेहतर तरीके से समाधान किया जा सके।

इस बीच मेकांग एमओयू को अवैध नशीली दवाओं के अंतरराष्ट्रीय खतरे का मुकाबला करने में कुछ हद तक सफलता प्राप्त करने के लिए एक प्रभावी ढांचे के रूप में मान्यता प्राप्त हुई है।

इसके भविष्य पर UNGASS (अप्रैल 19-21) के दौरान UNODC के कार्यकारी निदेशक यूरी फेदोतोव; ला क्वे वोंग, सार्वजनिक सुरक्षा उप मंत्री, वियतनाम; गुओ शेन्कुन, सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री, चीन; मिन्त त्वे, स्वास्थ्य मंत्री, म्यांमार; पैबून कूमचाया, न्याय मंत्री, थाईलैंड; कोउ चान्सिना, लाओ औषध नियंत्रण के राष्ट्रीय आयोग के अध्यक्ष; और संयुक्त राष्ट्र में कंबोडिया के स्थायी प्रतिनिधि री तूय के बीच एक उच्च स्तरीय "निजी बैठक" में विचार-विमर्श किया गया।

फेदोतोव ने कहा कि "नशीली दवाओं के नियंत्रण में सहयोग के लिए मेकांग एमओयू की व्यापक दूरदर्शिता एक संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बहस करने के लिए एक महत्वपूर्ण व्यावहारिक योगदान प्रदान करती है।" उन्होंने कहा कि "एमओयू करने वाले छः देशों के इनपुट नशीली दवाओं की क्षेत्रीय चुनौती से निबटने के लिए साझा भविष्य की दिशा तय करते हैं जिससे अंततः अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी फ़ायदा होगा।"

विभिन्न प्रकार और भारी मात्रा में नशीली दवाओं की तस्करी को लेकर मेकांग में समस्या के पैमाने पर प्रकाश डाला गया जिनका निरंतर सामना किया जा रहा है। जेरेमी डगलस, दक्षिण पूर्व एशिया और प्रशांत क्षेत्र के लिए UNODC के क्षेत्रीय प्रतिनिधि ने कहा "मेकांग बहुआयामी चुनौतियों से भरपूर नशीली दवाओं का एक विशिष्ट बाजार है जिसके लिए बहुमुखी समाधान की आवश्यकता है।"

वियना में संयुक्त राष्ट्र सूचना सेवा (UNIS) के अनुसार डगलस ने आगे कहा, "नीति निर्धारकों को संलग्न करना उत्साहजनक है क्योंकि वे आंकड़ों पर विचार करके और जवाब तैयार करके यह बताते हैं कि पिछली योजनाएं कितनी अच्छी तरह कारगर साबित हुई हैं।"

उल्लेखनीय ढंग से, मेकांग एमओयू नशीली दवाओं के खतरों से निबटने के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण को बढ़ावा देता है - जिसमें एक कार्यक्रम की रणनीति अपनायी जाती है जो कई विषयगत क्षेत्रों: कानून प्रवर्तन सहयोग; कानूनी और न्यायिक सहयोग; सतत वैकल्पिक विकास; और ड्रग्स, स्वास्थ्य तथा एचआईवी को कवर करता है।

UNIS ने कहा कि इस कार्यप्रणाली में एक समीक्षा प्रक्रिया की शुरू की गई है ताकि एमओयू भागीदार और UNODC चुनौतियां उत्पन्न होते ही उनकी पहचान सुनिश्चित कर सकें। इससे देशों को नशीली दवाओं के क्षेत्रीय बाजार की बदलती गतिशीलता के अनुकूल बनने और उनका सामना करने की क्षमता प्राप्त होती है और आगे बढ़ते हुए यह मेकांग एमओयू का एक अभिन्न तत्व बन जाता है।

डगलस ने कहा "सहयोग और सहकार्य के लिए एक प्रभावी बहुपक्षीय ढांचे के रूप में मेकांग एमओयू के उभरने को सूक्ष्म भौगोलिक हितों के साथ समाधानों की जरूरत की समझ के द्वारा मजबूती प्रदान की गई है।" "इसमें यह मान्यता शामिल है कि प्रभावी समाधानों को अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन की पहल से परे जाना और इसमें न्यायिक, विकास एवं स्वास्थ्य हितों को संलग्न किया जाना आवश्यक है।"

दक्षिण पूर्व एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए UNODC के क्षेत्रीय कार्यालय में ड्रग एनालिसिस एवं प्रोग्रामिंग के प्रमुख, तुन नाय सोय ने कहा "हम प्रतिक्रियाओं में सुधार के लिए काम कर रहे हैं।" "लेकिन महत्वपूर्ण बातयह है कि इन सुधारों में लगातार और अधिक से अधिक सामुदायिक और व्यक्तिगत स्वास्थ्य हितों को शामिल किया गया है, और ऐसा इस दृष्टिकोण से किया जाता है कि केवल लागू कर देने से वांछित परिणाम नहीं मिलते हैं।"

UNODC केअनुसार उप-क्षेत्रीय कार्य योजना (एसएपी) वह इंजन है जो एमओयू प्रक्रिया को आगे बढ़ाता है। यह एमओयू पर हस्ताक्षर करने वालों के सहयोगात्मक प्रयासों के लिए एक रणनीतिक रूपरेखा प्रदान करता है और कार्रवाई-उन्मुख कार्यक्रम उपलब्ध कराता है जो सदस्य सरकारों को व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से अवैध नशीली दवाओं के उत्पादन, तस्करी और दुरुपयोग से लड़ने में सहयोग करता है।

एसएपी में पांच विषयगत क्षेत्रों को शामिल किया गया है: कानून प्रवर्तन सहयोग; कानूनी एवं न्यायिक मामलों पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग; नशीली दवाओं की मांग में कमी; नशीली दवाएं और एचआईवी; और सतत वैकल्पिक विकास।

उपरोक्त पांच विषयगत क्षेत्रों में व्यक्तिगत कार्य योजनाएं शामिल हैं जो इन गतिविधियों और प्रयासों की रूपरेखा तैयार करने और लागू करने का काम करती हैं। अंततः इन गतिविधियों से सदस्य सरकारों की कानूनी, संस्थागत और परिचालन क्षमताओं में वृद्धि होती है।

UNODC का कहना है कि एसएपी को मुख्यतः स्पष्ट रूप से परिभाषित गतिविधियों और प्रयासों के द्वारा लागू किया जाता है जो विशिष्ट समस्याओं और परिचालन संबंधी कमजोरियों को दूर करता है। [20 अप्रैल, 2016]

यह लेख वैश्विक सहयोग परिषद और DEVNET जापान के साथ संयुक्त रूप से आईडीएन की मीडिया परियोजना का हिस्सा है।

फोटो: UNODC के कार्यकारी निदेशक यूरी फेदोतोव और वियतनाम के उपमंत्री ला क्वे वोंग मेकोंग एमओयू पर UNGASS के एक आयोजन की सह-अध्यक्षता करते हुए। क्रेडिट: UNODC

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