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The adoption of the 2030 Sustainable Development Agenda, with its core set of 17 Sustainable Development Goals (SDGs), are the UN’s blueprint for achieving a happier and healthier world by 2030. But how do we all manifest these goals in our own lives? The Be the Change Initiative provides an opportunity for all of us to better “walk the talk” when it comes to the SDGs. This initiative guides and encourages us to live more sustainable in work and at home by changing our consumption patterns, using active transport such as cycling, and buying local foods.

News & Analysis

संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने विकास के वित्तपोषण के लिए 'छुपे स्रोतों' को निशाना बनाया

थालिफ़ दीन द्वारा

संयुक्त राष्ट्र (आईपीएस) - संयुक्त राष्ट्र ने 2015 के पश्चात सितंबर में दुनिया के नेताओं द्वारा स्वीकृत 17 सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) सहित अपने विकास एजेंडा को लागू करने के लिए 3.5 ट्रिलियन से 5.0 ट्रिलियन डॉलर प्रति वर्ष की भरी भरकम रकम का अनुमान लगाया है।

लेकिन कम से कम एक मुख्य प्रश्न है जिसका उत्तर दिया जाना बाकी है: संयुक्त राष्ट्र किस प्रकार से अमीर देशों और दुनिया की बहुराष्ट्रीय कंपनियों को उन वैश्विक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अनिवार्य खरबों डॉलर इकट्ठा करने के लिए राज़ी करेगा, जिसमें 2030 तक गरीबी और भुखमरी हटाना शामिल है?

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, विकास के वित्त पोषण के लिए कम से कम एक "छुपा हुआ स्रोत" मौजूद है, खासकर दुनिया के सबसे गरीब महाद्वीपों के लिए: अफ्रीका से बाहर जाने वाले अवैध धन पर कब्जा करना, जो एक अनुमान के हिसाब से प्रति वर्ष 50 बिलियन डॉलर से भी अधिक है।

जेम्स झान, व्यापार और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (यूएनसीटीएडी) में निवेश और उद्यम के निदेशक, ने प्रतिनिधियों को बताया कि सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अफ्रीका के लिए अवैध वित्त प्रवाह से निपटना ज़रूरी है।

अफ्रीका से अवैध वित्तीय हस्तांतरण के रूप में बाहर जाने वाले संसाधनों की कीमत 2002 और 2012 के बीच में लगभग 530 बिलियन डॉलर थी।

"महाद्वीप के विकास के लिए वह एक बड़ी कीमत थी क्योंकि उन संसाधनों का निवेश अफ्रीका के आर्थिक विकास और ढांचागत परिवर्तन में किया जा सकता था।"

उन्होने कहा अवैध वित्त प्रवाह से संस्थाओं का महत्व कम होता है, देश के लिए ज़रूरी आर्थिक संसाधनों में कमी आती है, विकास के लिए संसाधनों के आधार में गिरावट आती है और जिसके कारण संसाधनों के अंतर को भरने के लिए अधिक घरेलू कर लगाए जाते हैं।

17 एसडीजी में अच्छी शिक्षा, उन्नत स्वास्थ्य सेवा, लिंग समानता, सतत ऊर्जा, पर्यावरण का संरक्षण और सतत विकास के लिए विश्व की भागीदारी भी शामिल हैं।

थर्ड वर्ल्ड नेटवर्क (टीडबल्यूएन) में वित्त और विकास कार्यक्रम में वरिष्ठ नीति शोधकर्ता, भूमिका मुच्छला ने आईपीएस को अवैध वित्त प्रवाह के तीन प्रमुख कारण बताए जो कि वाणिज्यिक कर चोरी, आपराधिक गतिविधि और सरकारी भ्रष्टाचार हैं।

उन्होने कहा कर चोरी और उसे देने में आनाकानी, साथ ही बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा हस्तांतरण के समय गलत कीमतें (व्यापार संबंधी गलत इनवॉइसिंग) लगाने की प्रथाएँ, मनी लांड्रिंग की प्रथाओं और नशीली वस्तुओं और श्रम की तस्करी जैसी आपराधिक गतिविधियों सहित सबसे बड़ी समस्या है।

उन्होने कहा, जैसा कि अनेक सामाजिक आंदोलनों, गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ), अकादमिकों और नीति निर्माताओं ने बताया, ऐसा अचानक नहीं होता।

अनेक देश और उनकी संस्थाएं विकासशील देशों में से बड़ी मात्रा में धन की चोरी करने में सक्रिय रूप से सहायता करती हैं और बहुत सारा लाभ कमाती हैं।

"इससे दशकों के आर्थिक विकास को धक्का लगता है और भविष्य की पीढ़ियों के लिए आर्थिक सहायता की उनकी जरूरतों से परे आगे विकास करने का मौका खो जाता है," उन्होने आगे कहा।

पिछले वर्ष की जाँच के बाद, अफ्रीका से अवैध वित्त प्रवाह पर एक उच्च स्तरीय पैनल ने निष्कर्ष निकाला कि ऐसे प्रवाह से लड़ना अब एक विकल्प नहीं रह गया है; यह ज़रूरी हो गया है।

यह पैनल, जिसकी स्थापना अफ्रीकी आर्थिक आयोग (ईसीए) द्वारा की गई थी, ने अफ्रीकी संघ (एयू) को "सम्पत्तियों का इस्तेमाल बंद करने, प्रबंधन करने और स्वदेश लौटाने की परिस्थितियों" का निर्धारण करने के लिए विश्व स्तर पर शासन रूपरेखा तैयार करने के लिए उसकी सहयोगी संस्थाओं को शामिल करने के लिए कहा।

दक्षिण कोरिया के राजदूत ओह जून, आर्थिक और सामाजिक परिषद (ईसीओएसओसी) के अध्यक्ष, ने अक्तूबर में यूएन पैनल में चर्चा पर प्रतिनिधियों को बताया कि अन्य क्षेत्रों के समान, अफ्रीका को महाद्वीप के अंदर से ही संसाधनों को एकजुट करना होगा।

और वित्त के बाहर की ओर अवैध प्रवाह से विदेशी मुद्रा के भंडार की हानि होती है, इससे वैध कराधार कम होता है और प्राकृतिक संसाधनों से बीते निवेश के अवसर बंट जाते हैं, उन्होने आगे बताया।

यदि ऐसा अवैध प्रवाह जारी रहे तो प्रति वर्ष 50 बिलियन डॉलर के अनुमानित अवैध वित्त प्रवाह के साथ, घरेलू संसाधन एकजुट करने का असर महत्वपूर्ण रूप से कम होता है, उन्होने तर्क दिया।

सितंबर में महासभा के उच्च स्तरीय खंड का संबोधन करते हुए, सेनेगल के राष्ट्रपति, मैकी साल, ने कहा अफ्रीका से अवैध वित्त प्रवाह वास्तव में महाद्वीप को दी जाने वाली आधिकारिक विकास सहायता (ओडीए) से आगे बढ़ गया है (जो प्रति वर्ष लगभग 50 से 55 बिलियन डॉलर है)।

"यदि उन सम्पत्तियों के 17 प्रतिशत को भी वापस लाया जाता है, तो अफ्रीकी देश अपना पूरा ऋण चुका सकते हैं और अपने विकास के लिए स्वयं धन का प्रबंध कर सकते हैं।"

यूएनसीटीएडी के झान ने कहा केवल अफ्रीका ही वह क्षेत्र है जहाँ अवैध वित्तीय प्रवाह सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग 5 फीसदी है।

उन्होने सिविल सोसाइटी को मजबूत कर पारदर्शिता और जवाबदेही पर ज़ोर दिया और संस्थागत सुधारों को बढ़ावा देने और भ्रष्टाचार-रोधी आयोगों के निर्माण की बात कही।

उन्होने कहा समस्या से निपटने में अफ्रीकी सरकारों के साथ ही अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की भी बड़ी ज़िम्मेदारी है।

लेकिन अफ्रीकी देश ऐसा अकेले नहीं कर सकते हैं। बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफ़डीआई) भी समाधान का एक अहम हिस्सा हैं। यूएनसीटीएडी जैसी संयुक्त राष्ट्र एजेंसियां निवेश नीतियाँ तैयार करने और बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा कर बचाने और अवैध प्रथाओं का प्रबंधन करने में अफ्रीकी सरकारों को परामर्श दे सकती हैं, झान ने कहा।

मुच्छला ने आईपीएस को बताया जबकि अनेक संगठन सूचना साझा करने में सुधार और पारदर्शी नीतियों की ज़रूरत पर ज़ोर डाल रहे हैं, यूरोपियन संघ और अमेरिका में, टैक्स जस्टिस नेटवर्क, एक प्रमुख सामाजिक आंदोलन जिसमें विभिन्न एनजीओ शामिल हैं, कर चोरी और कर देने में आनाकानी से लड़ने पर ज़ोर डाल रहा है।

इस हद तक, विकास के लिए वित्त (एफ़एफ़डी) के तीसरे सम्मेलन के लिए यूएन की सामान्य सदस्यता के साथ यूएन विश्व कर संस्था स्थापित करने के लिए एक पक्ष समर्थन अभियान 2014-2015 में चलाया गया था।

जुलाई 2015 में अदिस अबाबा में आयोजित सम्मेलन विकसित देशों के विरोध के कारण विश्व कर संस्था के लिए सहमति जुटाने में असफल रहा।

हालाँकि यह एक बड़ी निराशा है, उन्होने कहा, विकासशील देशों और विश्व के सामाजिक आंदोलनों द्वारा विश्व कर संस्था के लिए दबाव यूएन के अंदर और बाहर दोनों ओर से दिया जाता रहेगा। (5 नवंबर 2015)

यह लेख आईपीएस उत्तरी अमेरिका, वैश्विक सहयोग परिषद और डेवनेट टोक्यो की संयुक्त मीडिया परियोजना का हिस्सा है।

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