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News & Analysis

संयुक्त राष्ट्र उत्तरी और मध्य एशिया में सतत विकास में तेजी लाएगा

लेखक देविंदर कुमार

नई दिल्ली (आईडीएन) - 1 जनवरी से शुरू करते हुए दो वर्षों के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अस्थाई सदस्य के रूप में निर्वाचित होने के कुछ ही दिनों के भीतर कज़ाकस्तान ने "उत्तरी और मध्य एशिया के लोगों की सामाजिक और आर्थिक विकास संबंधी महत्वपूर्ण आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए साझेदारी में काम करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि कर दी है।"

इस प्रयोजन के लिए 11 जुलाई को बैंकॉक में एशिया और प्रशांत क्षेत्र के लिए संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक आयोग (ईएससीएपी) और कज़ाकस्तान सरकार के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर किया गया।

मेजबान देश के समझौते के पूरक के साथ, इस समझौते के तहत कज़ाकस्थान सरकार ने ईएससीएपी के उत्तरी और मध्य एशिया के उपक्षेत्रीय कार्यालय (एसओएनसीए) के लिए परिसर के साथ-साथ कार्यालय के परिचालन एवं प्रोग्राम संबंधी लागतों के लिए एक आवर्ती वार्षिक अनुदान उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है।

यह कार्यालय कज़ाकस्थान सरकार की पहल पर और संयुक्त राष्ट्र महासभा के एक प्रस्ताव के अनुरूप अल्माटी - कज़ाकस्थान के प्रमुख व्यावसायिक केंद्र - में 5 जुलाई, 2011 को में खोला गया था ताकि सदस्य देशों की विकासपरक प्राथमिकताओं का बेहतर तरीके से समाधान किया जा सके और समावेशी एवं सतत विकास का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में प्रगति को तेज करने के लिए क्षेत्रीय सहयोग एवं एकीकरण को सुदृढ़ किया जा सके।

थाईलैंड में कज़ाकस्तान के असाधारण राजदूत एवं पूर्णाधिकारी और ईएससीएपी के स्थायी प्रतिनिधि, मारात एसेनबायेव ने उदघाटन समारोह को "ईएससीएपी और उत्तरी एवं मध्य एशिया के देशों के बीच सहयोग बढ़ाने और इसे गहरा करने में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।"

उन्होंने कहा, "यह इस तथ्य को देखते हुए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है कि कज़ाकस्तान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का एक अस्थाई सदस्य बन गया है।" उन्होंने आगे कहा, "यह संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न संस्थाओं में हमारे कार्य के संबंध में कज़ाकस्तान पर कहीं अधिक बड़ी जिम्मेदारी डालता है। मुझे विश्वास है कि आज इस समझौते पर हस्ताक्षर होने से उत्तरी और मध्य एशिया के विकास के लिए संयुक्त राष्ट्र की मौजूदा और नई परियोजनाओं तथा कार्यक्रमों दोनों के कार्यान्वयन को एक नई गति मिलेगी।"

ईएससीएपी के कार्यकारी सचिव डॉ. शमशाद अख्तर, जो संयुक्त राष्ट्र के अंडर-सेक्रेटरी जनरल भी हैं, ने कहा: "आज का हस्ताक्षर समारोह उत्तर और मध्य एशियाई उपक्षेत्र के विकास के लिए एक सार्थक योगदान बनाने की दिशा में हमारी यात्रा में एक महत्वपूर्ण कदम है।"

उन्होंने कहा: "इस समझौते का निष्कर्ष कार्यालय की स्थिति को मजबूत करता है और इसके निरंतर परिचालन के लिए आश्वासन प्रदान करता है जिससे मध्य एशिया में संयुक्त राष्ट्र के कार्यालयों के केंद्र के रूप में अल्माटी की प्रस्तावित भूमिका को मजबूती मिलती है। हम कार्यालय को अपनी उदार सहायता प्रदान करने के लिए कजाकिस्तान सरकार के आभारी हैं।"

एसओएनसीए (सोनका) आर्मेनिया, अजरबैजान, जॉर्जिया, कज़ाखस्तान, किर्गिस्तान, रूसी फाउंडेशन, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान के साथ काम करता है - यह सतत विकास के लक्ष्यों (एसडीजी) को हासिल करने की दिशा में क्षेत्रीय प्रगति में तेजी लाने में सहयोग के लिए अपने अपने मानक और विश्लेषणात्मक कार्य, नीतिगत समर्थन और क्षमता-निर्माण गतिविधियों के साथ-साथ क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के अपने उपायों का उपयोग करता है।

अफगानिस्तान भी मध्य एशिया की अर्थव्यवस्थाओं के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष कार्यक्रम (एसपीईसीए) के एक सदस्य के रूप में उत्तरी और मध्य एशिया की गतिविधियों में भाग लेता है। इस कार्यक्रम का शुभारंभ 1998 में मध्य एशिया में उपक्षेत्रीय सहयोग को सुदृढ़ करने और विश्व अर्थव्यवस्था में इसके एकीकरण के उद्देश्य से किया गया था।

एसपीईसीए (स्पेका) देशों में अफगानिस्तान के अलावा अजरबैजान, कज़ाकस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उजबेकिस्तान शामिल हैं। यूरोप के लिए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक आयोग (यूएनईसीई) और ईएससीएपी इस कार्यक्रम के लिए समग्र समर्थन प्रदान करते हैं।

स्पेका का रणनीतिक महत्व मध्य एशिया को यूएनईसीई क्षेत्र के भीतर एक विशिष्ट क्षेत्र बनाता है: यह यूरोप और एशिया की ऊर्जा सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, यह दो महाद्वीपों के बीच एक संभावित परिवहन केंद्र है और आतंकवाद, धार्मिक उग्रवाद या नशीले पदार्थों की तस्करी जैसी वैश्विक सुरक्षा की चुनौतियों के विरुद्ध लड़ाई में एक सक्रिय भूमिका निभाता है।

मध्य एशियाई देश इस तथ्य से उभरती चुनौतियों का सामना कर रहे हैं कि वे सभी लैंडलॉक्ड हैं, आर्थिक विकास के अलग-अलग रास्तों का अनुसरण करते हैं और यहां ऊर्जा निर्यातक और गैर-ऊर्जा निर्यातक देशों की आय के स्तरों के बीच की खाई तेजी से बढ़ती जा रही है।

इसलिए इन राज्यों को अपनी-अपनी अर्थव्यवस्थाओं के विविधीकरण के एक तात्कालिक कार्य को पूरा करना आवश्यक है जिसमें उनको ऊर्जा और कमोडिटी निर्यातकों की अपनी वर्तमान स्थिति से दूर जाना होगा। क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करना इस क्षेत्र के सभी देशों के, तेजी से संतुलित और सतत आर्थिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण पूर्व शर्त है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, उनको अपने रणनीतिक लाभ का पूरी तरह से फ़ायदा उठाने के लिए और उन चुनौतियों का संयुक्त रूप से और कुशलता से सामना करने के लिए, जो संभवतः क्षेत्र को अस्थिर कर सकते हैं, करीबी क्षेत्रीय सहयोग की आवश्यकता है। [IDN-InDepthNews – 11 जुलाई 2016]

IDN इंटरनेशनल प्रेस सिंडिकेट की प्रमुख एजेंसी है।

यह आलेख वैश्विक सहयोग परिषद और DEVNET जापान के साथ संयुक्त रूप से आईडीएन के मीडिया प्रोजेक्ट का हिस्सा है।

 

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