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Shared prosperity and well-being for all by 2030 is the target the international community has set itself in the Sustainable Development Goals (SDGs) adopted on September 25, 2015 at the UN Summit in New York. This joint media project with DEVNET Japan Foundation highlights sustainability - in the fields of development, environment and food and nutrition. DEVNET was founded by Roberto Savio in 1985 as an international Association with headquarters in Rome.
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News & Analysis

विकास सहयोग एशिया-प्रशांत देशों के लिए महत्वपूर्ण

लेखक जे. नेस्ट्रेनिस

न्यूयॉर्क (आईडीएन) - संयुक्त राष्ट्र के एक उच्च पदस्थ अधिकारी ने राष्ट्रीय नियोजन और बजटीय प्रक्रियाओं में 2030 के सतत विकास के एजेंडे को कार्यरूप देने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

यह विशेष आवश्यकताओं वाले देशों में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है - यह बात संयुक्त राष्ट्र के लिए एशिया और प्रशांत के आर्थिक और सामाजिक आयोग (ईएससीएपी) के प्रमुख ने 21 जुलाई को न्यूयॉर्क में विकास सहयोग फोरम (डीसीएफ) की पांचवीं द्विवार्षिक उच्च-स्तरीय बैठक के मौके पर कही।

क्षेत्रीय सहयोग पर उच्च-स्तरीय पैनल का शुभारंभ करते हुए संयुक्त राष्ट्र के अंडर-सेक्रेटरी जनरल और ईएससीएपी के कार्यकारी सचिव डॉ. शमशाद अख्तर ने रेखांकित किया कि अल्प विकसित देशों (एलडीसी), लैंडलॉक्ड विकासशील देशों (एलएलडीसी) और छोटे द्वीपीय विकासशील देशों (एसआईडी) को संरचनात्मक चुनौतियों की एक श्रृंखला का सामना करना पड़ता है जो घरेलू आर्थिक विविधीकरण, सीमित उत्पादक क्षमताओं और बाहरी आघातों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ने के परिणाम स्वरूप उत्पन्न होती हैं जिसने संरचनात्मक परिवर्तन को बाधित किया है।

"सतत विकास के लक्ष्यों को पूरा करने के क्रम में विकास के भागीदारों को विकास सहयोग का ढ़ांचा तैयार करके उस पर काम करना चाहिए" - यह बात डॉ. अख्तर ने '2030 के एजेंडे को अपनाने और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में विकास सहयोग की भूमिका' विषय पर एक प्रासंगिक आयोजन के दौरान कही। इस कार्यक्रम का आयोजन अल्प विकसित देशों के उच्च प्रतिनिधि के कार्यालय (ओएचआरएलएलएस) की भागीदारी में ईएससीएपी द्वारा किया गया था।

उन्होंने कहा, "वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और मंदी को देखते हुए वित्त, व्यापार और निवेश के लिए अधिक सहयोगी वैश्विक भागीदारी महत्वपूर्ण होगी, विशेष रूप से विशेष आवश्यकताओं वाले देशों के व्यापार में, जो कुल क्षेत्रीय व्यापार का मुश्किल से 0.9 प्रतिशत होता है।"

डॉ. अख्तर ने आगे बताया, "ईएससीएपी, अपने क्षेत्रीय संपर्क और व्यापार सुविधा कार्यक्रमों के माध्यम से इन देशों को अपने व्यापार की संभावनाओं को सुधारने के लिए सहयोग करने पर ध्यान केंद्रित करेगा।"

ओएचआरएलएलएस के अंडर-सेक्रेटरी-जनरल ज्ञान चंद्र आचार्य ने कहा कि सतत विकास के लक्ष्यों (एसडीजी) का राष्ट्रीय विकास की रणनीति में एकीकरण "सही दिशा में उठाया गया पहला कदम है।"

आचार्य ने आगे कहा, "चूंकि राष्ट्रीय बहु-हितधारक नेतृत्व निस्संदेह एसडीजी की प्राप्ति के पीछे सबसे महत्वपूर्ण प्रेरणा शक्ति है, ऐसे में एलडीसी, एलएलडीसी और एसआईडी पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है ताकि उनको अपने प्रभावी कार्यान्वयन के लिए एक सुसंगत राष्ट्रीय रणनीति बनाने में मदद की जा सके"।

उन्होंने कहा, "संस्थागत विकास और कार्यान्वयन प्रणाली में क्षमता वृद्धि सहयोग के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी एक मजबूत और निरंतर समर्थन की जरूरत है।"

उच्च-स्तरीय पैनल में वरिष्ठ मंत्री और एशिया-प्रशांत क्षेत्र के निजी क्षेत्र तथा सिविल सोसायटी के प्रतिनिधि शामिल थे। डीसीएफ अंतरराष्ट्रीय विकास सहयोग के नवीनतम रुझानों की समीक्षा के लिए दुनिया भर के नीति निर्धारकों और प्रैक्टिशनरों को संलग्न करता है।

इस साल 21-22 जुलाई को आयोजित बैठक में 2030 के एजेंडे के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए एक लीवर के रूप में विकास सहयोग के महत्व और इसकी अपार संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है। [IDN-InDepthNews – 22 जुलाई 2016]

यह आलेख वैश्विक सहयोग परिषद और DEVNET जापान के साथ संयुक्त रूप से आईडीएन के मीडिया प्रोजेक्ट का हिस्सा है।

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