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News & Analysis

पारंपरिक चिकित्सा के साथ आधुनिक का मेल

 डॉ. टेरूओ हिरोस का दृष्टिकोण *

टोक्यो (आईडीएन) - अपने पिता, जापान में युद्ध पश्चात उदारवादी, सीनेटर, उपमंत्री, शिक्षा एवं संसदीय सचिव के प्रभाव के तहत, जब प्रधानमंत्री शिगेरू योशीदा ने 1952 में सैन फ्रांसिस्को शांति संधि पर हस्ताक्षर किए, मैंने भी दुनिया के समाजों में शांति लाने के लिए राजनयिक बनने का लक्ष्य रखा। हालांकि, जल्दी ही मैं एक चिकित्सक बनने की कामना करने लगा, क्योंकि मुझे लगा कि इस पेशे द्वारा मैं अनेक ज़िंदगियों की रक्षा कर सकता था।

एक चिकित्सा छात्र के रूप में मैंने संयुक्त राज्य में अध्ययन किया और हृदय की सर्जरी में अध्ययन करने का निर्णय लिया, जो उस समय एक विकासशील क्षेत्र था। मुझे प्रोफेसर चार्ल्स पी. बेली के अंतर्गत कार्डियक सर्जरी का अध्ययन करने का अवसर प्राप्त हुआ, जिन्होंने फिलाडेल्फिया में हैनिमैन विश्वविद्यालय में कार्डियक सर्जरी इकाई की स्थापना की थी।

उस समय शोध पर स्वयं को आधारित करते हुए, मैंने निष्कर्ष निकाला कि ऑटोलॉगस ऊतक संरक्षण सबसे वांछनीय होता है क्योंकि व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा अंदर डाले गए ऊतक की अस्वीकृति को टाला नहीं जा सकता है यदि मानव शरीर में बाह्य वस्तु को प्रवेश किया जाए। तब से ही, मैंने इस विचार को अपनी ऑपरेटिंग कार्यविधियों में लागू किया है।

संयुक्त राज्य में अध्ययन करने के दौरान, हालांकि हृदय प्रत्यारोपण और कृत्रिम हृदय में तकनीकी शोध अभी जारी था, पशुओं पर किए गए प्रयोगों ने पुष्टि कर दी थी कि अस्वीकृति प्रतिक्रिया दीर्घकालिक अस्तित्व में बाधा थी। इसलिए मैंने रोगी के स्वयं के ऊतकों के उपयोग से हृदय के वाल्व की मरम्मत पर ज़ोर देना आरंभ किया।

1958 में, मैंने हृदय की धड़कन जारी रहते हुए आवर्धक लेंस के उपयोग से रोगी के आंतरिक स्तन और दाएँ जठरान्त्र दोनों की ऑटोलॉगस धमनी वाहिकाओं के साथ तीन मुख्य संकुचित ट्रंक कोरोनरी धमनियों का सीधे सम्मिलन करने में सफलता प्राप्त की।

फिर, मैंने 300 ओपन हार्ट ऑपरेशन सहित 7000 यहोवा गवाह मुसलमानों की सर्जरी की, बिना खून चढ़ाए जिसके लिए उन्होने धार्मिक कारणों से मना कर दिया था। श्रोणि, महाधमनी धमनीविस्फार के कुल उच्छेदन और अन्य बड़ी सर्जरी के साथ भी, किसी भी रोगी की मृत्यु नहीं हुई, उनकी भी नहीं जिनके खून का गाढ़ापन सामान्य गाढ़ेपन का पांचवा हिस्सा था और हीमोग्लोबिन स्तर 3g/dl था (जिसकी संख्या कुल मामलों में से 100 थी)।

बिना खून चढ़ाए ऑपरेशन करने के पीछे का मेरा कारण यह था कि मेरा मानना था कि मुझे उन रोगियों की मांग को पूरा करने के लिए सर्जरी की तकनीक में सुधार करना चाहिए जिन्हें धार्मिक कारणों से खून नहीं चढ़ाया जा सकता है। आज, कृत्रिम हृदय-फेफड़ा मशीनों के सुधार की बदौलत ओपन हार्ट सर्जरी की कुल संख्या का एक-तिहाई हिस्सा बिना खून चढ़ाए किया जाता है।

इस बीच, यह मानते हुए कि मानव जाति को बराबर रूप से सर्वश्रेष्ठ और सबसे उपयुक्त चिकित्सा देखभाल दी जाए, मैंने 137 देशों का दौरा किया उनकी स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों और पारंपरिक चिकित्सा का विश्लेषण करने के लिए। मैंने पाया कि केवल 20 देशों में ही प्रति  व्यक्ति 3,000 अमेरिकी डॉलर के बराबर स्वास्थ्य देखभाल पर खर्च किया जाता है और बाकी देश - जिन्हें विकासशील या उभरते हुए देश कहते हैं - स्वास्थ्य देखभाल के ऊपर 100 और 300 अमेरिकी  डॉलर के बीच खर्च करते हैं।

इसका मतलब है कि 70 प्रतिशत मानव जाति को मजबूरी में जातीय पारंपरिक चिकित्सा पर निर्भर रहना पड़ता है। इसके अलावा, तीन मुख्य धर्मों की सैद्धांतिक शक्ति द्वारा चिकित्सा मूल्यों का क्षरण स्वास्थ्य सहायता में बाधा पहुंचा रहा है जिसका कि निर्माण मूल निवासियों ने ऐतिहासिक परंपरा के माध्यम से किया है।

इसलिए खतरनाक धार्मिक आस्थाओं, अंधविश्वास, महिला खतना और बाल गर्भधारण आदि को समाप्त करते हुए और आधुनिक चिकित्सा के साथ मेल को बढ़ावा देते हुए जन कल्याण और स्वास्थ्य के लिए हानिरहित पारंपरिक धर्मों और पारंपरिक चिकित्साओं को सहेजने की आवश्यकता है।

बेशक, इन देशों को सबसे पहले पर्याप्त सुरक्षित जल आपूर्ति, सीवरेज और सड़क नेटवर्क के निर्माण, खाद्य स्थिति में सुधार द्वारा संक्रमण को रोकने का प्रयास करना होगा और कम से कम बुनियादी उपकरणों के साथ आधुनिक चिकित्सा क्लीनिकों की स्थापना करनी होगी।

समान स्वास्थ्य देखभाल प्राप्त करने के लिए, आधुनिक चिकित्सा टेक्नॉलॉजी  के प्रसार से पहले, प्रत्येक देश के समुदाय, धर्म और पारंपरिक चिकित्सा को सही से समझना भी अनिवार्य होगा, उसके बाद उन्हें मान्य विकल्पों की जानकारी देनी होगी। इसके लिए न केवल स्वास्थ्य देखभाल विशेषज्ञों बल्कि राजनेताओं और समाज विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में विशेषज्ञों की आवश्यकता होगी जिसका समन्वय वैश्विक परिप्रेक्ष्य वाले संगठन, जैसे विश्व स्वास्थ्य संगठन को करना होगा। [आईडीएन - इनडेप्थन्यूज़ - 30 जुलाई 2016]

*डॉ. टेरूओ हिरोस एक कार्डियक सर्जन हैं, जो असोसियेशन फॉर इंटरनेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकेयर के अध्यक्ष हैं, और शुमे विश्वविद्यालय में ससम्मान सेवामुक्त प्रोफेसर हैं। उन्हें दुनिया में सबसे पहले खून चढ़ाए बिना ओपन-हार्ट सर्जरी करने में सफलता प्राप्त हुई थी। वे पहले जापानी हैं जिन्होने यूनाइटेड स्टेट्स मेडिकल असोसियेशन से स्वर्ण पदक जीता। कार्डियक सर्जरी के क्षेत्र में वे विश्व विशेषज्ञ हैं।

यह लेख ग्लोबल कॉर्पोरेशन काउंसिल और डेवनेट जापान के साथ संयुक्त रूप से आईडीएन की मीडिया परियोजना है।

 

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