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News & Analysis

जापान को आतंकवाद रोकने के लिए क्राइम ऑफ कॉन्सपिरेसी की जरूरत

कत्सुई हिरासावा का नजरिया *

टोक्यो (आईडीएन) - दुनिया अब इस्लामी चरमपंथियों के आतंक से हिल गई है और जापान इस आतंकवाद से असंबद्ध नहीं है।

जापान एक द्वीप राष्ट्र है जिसकी किसी दूसरे देश के साथ सीधी सीमा नहीं है। हम पश्चिमी देशों की तरह अनेक आप्रवासियों को स्वीकार नहीं करते हैं और इसलिए एक एकीकृत राष्ट्र के रूप में अपनी मानसिक शांति के कारण हम आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए पर्याप्त उपाय नहीं करते हैं।

यहाँ तक कि हममें से कुछ लोग विश्व के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर होने वाले आतंकवादी हमलों को आग के विपरीत किनारे के रूप में देखते हैं। अतीत में असामा-सान्सो को बंधक बनाये जाने का मामला और कोलिशन रेड आर्मी द्वारा जेएएल विमान अपहरण की घटना हुई है जो नाटकीय अपराध थे और टीवी पर इनकी लाइव रिपोर्टिंग की गई। ज्यादातर जापानी लोगों ने इन घटनाओं को आतंकवाद के रूप में मान्यता नहीं दी होगी।

भविष्य में जापान में कई ऐसी घटनाएं होने वाली हैं जो आतंकवादी हमलों का लक्ष्य हो सकती हैं, उदाहरण के लिए टोक्यो ओलंपिक 2020, और इसलिए हमें तत्काल आतंकवाद निरोधक उपायों को अपनाने की जरूरत है।

आतंकवादी हमले जो इस्लामी चरमपंथियों द्वारा बढ़ावा दिये जाने वाले प्रतीत होते थे, 1980 के दशक के बाद से अनेक अवसरों पर जापान में हुए हैं।

1988 में टोक्यो में सऊदी अरब एयरलाइंस के कार्यालय को बम से उड़ा दिया गया था। 1991 में सुकुबा विश्वविद्यालय में एक एसोसिएट प्रोफेसर की ह्त्या कर दी गई थी - क्योंकि उन्होंने सलमान रुश्दी द्वारा लिखे उपन्यास का अनुवाद किया था। मशहूर लेखक सलमान रुश्दी को ईरानी क्रांति के सर्वोच्च नेता खुमैनी ने मौत की सजा सुनाई थी।

इसके अलावा 2003 में आतंकवाद के आरोप में जर्मनी में गिरफ्तार एक आदमी के बारे में पता चला था कि उसने एक जाली पासपोर्ट के साथ कई बार जापान में प्रवेश और प्रस्थान किया था। 2007 में संयुक्त राज्य अमेरिका में यह भी पता चला था कि अल-कायदा के लीडर टोक्यो में अमेरिकी दूतावास के खिलाफ हमले की योजना बनाने में शामिल थे।

2015 में 'इस्लामिक स्टेट' (आईएस) के आतंक ने अन्य देशों में तीन जापानी नागरिकों की ह्त्या कर दी थी। इस्लामिक स्टेट की प्रचार पत्रिका दाबिक ने घोषणा की है कि जापानियों को आगे भी निशाना बनाया जाता रहेगा।

आईएस के ताजा आतंकवादी हमले पारंपरिक आतंकवाद से अलग हैं। एक विशेषता यह है कि दुनिया के कई हिस्सों में इसी विचारधारा के अनुयायी पृथ्वी के हर हिस्से में आतंक फैलाने में जुटे हैं। दूसरी विशेषता यह है कि वे सख्ती से पहरा दिये जाने वाले स्थानों से परहेज करते हैं लेकिन ऐसे स्थानों को चुनते हैं जहां पर बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा होते हैं। पेरिस में पिछले साल के आतंकवादी हमलों में थिएटरों और रेस्तरांओं को निशाना बनाया गया था।

पिछले मामलों को पीछे मुड़कर देखें तो पहले से जानकारी प्राप्त करना भविष्य में आतंकवाद को रोकने के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसे शायद ही कभी खबर के रूप में कवर किया जाता है, लेकिन अन्य देशों में सुरक्षा अधिकारियों के पास विशेष अधिकार होते हैं, जैसे कि व्यापक श्रेणी की संचार अवरोधन तकनीक या अस्थायी गिरफ्तारी, जिसने कई आतंकवादी हमलों को रोकने का काम किया है। दूसरी ओर, एक आतंकवादी को नियंत्रित करने के लिए जापानी अधिकारियों को दिये गए अधिकार लगभग एक चोर के मामले में मिले अधिकार के समान ही हैं।

वर्तमान में, व्यापक संचार अवरोधन या आपराधिक दंड की सौदेबाजी जैसे उपायों के बारे में जापान में अध्ययन किया गया है लेकिन वे अभी भी अपर्याप्त हैं। गंभीर अपराधों के मामले में कई देशों में पहले से क्राइम ऑफ कॉन्सपिरेसी शुरू की गई है जिसमें एक वास्तविक अपराध की घटना होने से पहले के कुछ कृत्यों को शामिल किया गया है और यह सजा के अधीन है।

क्राइम ऑफ कॉन्सपिरेसी को शुरू करने पर 10 वर्षों से अधिक समय से जापान के डाईट में चर्चा की गई है। हालांकि विपक्षी दल और बार एसोसिएशनों का जापानी फेडरेशन मानव अधिकारों के उल्लंघन के भय की वजह से इसके खिलाफ रहे हैं। नतीजतन इसे अभी तक नहीं शुरू किया गया है।

हालांकि आतंकवाद की रोकथाम की दृष्टि से अन्य देशों के उदाहरण को देखते हुए क्राइम ऑफ कॉन्सपिरेसी अत्यंत प्रभावी विकल्प है। चिंताओं को दूर करने के लिए जापान में लक्ष्य अपराधों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करने और क्राइम ऑफ कॉन्सपिरेसी को जल्द से जल्द लागू करने के बारे में आपका क्या कहना है? [आईडीएन-InDepthNews – 16 जुलाई 2016]

यह आलेख वैश्विक सहयोग परिषद और DEVNET जापान के साथ संयुक्त रूप से आईडीएन के मीडिया प्रोजेक्ट का हिस्सा है।

* कत्सुई हिरासावा प्रतिनिधि सभा के एक लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के लगातार सात बार से निर्वाचित सदस्य और प्रतिनिधि सभा के बजट पर स्थायी समिति के निदेशक हैं। 2014 में उन्होंने उत्तर कोरियाई अपहरणों तथा अन्य मुद्दों पर प्रतिनिधि सभा की विशेष समिति की अध्यक्षता की थी। 1994 में वे नेशनल पुलिस एजेंसी के कमिश्नर जनरल के सचिवालय के सभासद थे।

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